तुवालु, एक छोटा प्रशांत महासागरीय द्वीपीय देश, जलवायु परिवर्तन के कारण गहरे संकट में है। समुद्र का बढ़ता स्तर और डूबती भूमि यहां की जीवनशैली को खतरे में डाल रहे हैं। इस समस्या ने तुवालु के निवासियों के पलायन को मजबूर कर दिया है, क्योंकि उनकी भूमि धीरे-धीरे समुद्र में विलीन हो रही है।
ऑस्ट्रेलिया, जहां तुवालु के कई निवासियों ने शरण ली है, एक जरूरी राहत प्रदान कर सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि समस्या हल हो गई है। वहाँ के वीजा का विकल्प केवल एक अल्पकालिक समाधान है, जब तक कि वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
तुवालु का अनुभव जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों की गवाही देता है, जिसमें सिर्फ इस देश का अस्तित्व ही दांव पर नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है बाकी दुनिया के लिए भी। उचित उपायों के बिना, यह जलवायु संकट अन्य छोटे द्वीपीय देशों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।
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